प्रतिक्षा सस्मित

थोरै थोरै पानी सँगै थोरै थोरै हुरी

जान्छ कि त बतास पनि मलाई नकुरी


बगैंचा झैँ लाग्छ आकाश फुल्छन जून तारा

टिप्न खोज्छु सक्दिन खै धेरै छ रे दुरी


~ प्रतिक्षा सस्मित ~

Pratikshya Sasmit


प्रतिक्षा सस्मित

पोखरा